gaane wali soorat achhi ho to mohamal she'r ka matlab bhi samajh mein aa jata hai.
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मेहनत तो करता हूँ फिर भी घर ख़ाली है बाबूजी मिट्टी के कुछ दीपक ले लो दीवाली है बाबूजी मिट्टी बेच रहा हूँ जिस में कोई जाल फ़रेब नहीं सोना चाँदी दूध मिठाई सब जा'ली है बाबूजी
Gyan Prakash Akul
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हर मुलाक़ात पे सीने से लगाने वाले कितने प्यारे हैं मुझे छोड़ के जाने वाले ज़िंदगी भर की मोहब्बत का सिला ले डूबे कैसे नादाँ थे तिरे जान से जाने वाले
Vipul Kumar
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आँसू पोंछ के हँस देता है आग में आग लगाने वाला
Arzoo Lakhnavi
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दुनिया को मारा जिगर के शे'रों ने जिगर को शराब ने मारा
Jigar Moradabadi
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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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ये चंद बे-जान से ही अश'आर हैं मिरे प्यार के ख़ातिर मिरी ग़ज़ल एक बेवा के आँसुओं में इस तरह डूबी है
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ये चाँद तुम्हारे मुक़ाबिल भी तो नहीं मैं तुम को देख के ईद मनाऊँगा
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ज़रा रख ले तू नाम उस का लबों पर ख़ुदा की इबादत में राहत मिलेगी
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तुम अगर छोड़ कर मुझ को जाना फिर दोबारा न इस दिल में आना
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ये ज़िन्दगी की दौड़ दौड़कर मिला ही क्या हमें न जीता शख़्स घर जा पाता है न हारा शख़्स ही
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