हर मुलाक़ात पे सीने से लगाने वाले कितने प्यारे हैं मुझे छोड़ के जाने वाले ज़िंदगी भर की मोहब्बत का सिला ले डूबे कैसे नादाँ थे तिरे जान से जाने वाले
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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क्या बोला मुझे ख़ुद को तुम्हारा नहीं कहना ये बात कभी मुझ सेे दुबारा नहीं कहना ये हुक़्म भी उस जान से प्यारे ने दिया है कुछ भी हो मुझे जान से प्यारा नहीं कहना
Ali Zaryoun
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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तेरा बनता था कि तू दुश्मन हो अपने हाथों से खिलाया था तुझे तेरी गाली से मुझे याद आया कितने तानों से बचाया था तुझे
Ali Zaryoun
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मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी
Bashir Badr
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बचा के आँख बिछड़ जाएँ उस से चुपके से अभी तो अपनी तरफ़ ध्यान भी ज़ियादा नहीं
Vipul Kumar
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कुछ इस लिए भी तेरी आरज़ू नहीं है मुझे मैं चाहता हूँ मेरा इश्क़ जावेदानी हो
Vipul Kumar
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उसे तो दौलत-ए-दुनिया भी कम भी पाने को मिरी तो ज़ात का मीज़ान भी ज़ियादा नहीं
Vipul Kumar
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दिल भी अजीब ख़ाना-ए-वहदत-पसन्द था इस घर में या तो तू रहा या बे-दिली रही उस ने तो यूँँ ही पेड़ बनाया था रेत पर मिट्टी वहाँ हज़ार बरस तक हरी रही
Vipul Kumar
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तेरा प्यार मेरी ज़िंदगी में बहार ले कर आया है तेरे आने से पहले हर दिन पतझड़ हुआ करता था
Vipul Kumar
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