गले से लगते ही जितने गिले थे भूल गए वगर्ना याद थीं हम को शिकायतें क्या क्या
sherKuch Alfaaz
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या'नी तुम वो हो वाक़ई हद है मैं तो सच-मुच सभी को भूल गया
Jaun Elia
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भूलभुलैया था उन ज़ुल्फ़ों में लेकिन हम को उस में अपनी राहें दिखती थीं आप की आँखों को देखा तो इल्म हुआ क्यूँँ अर्जुन को केवल आँखें दिखती थीं
Ashraf Jahangeer
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उसी का मुन्तज़िर भी है हमारा दिल उसी को भूलना भी चाहते है हम
Rohit Gustakh
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रेख़्ते के तुम्हीं उस्ताद नहीं हो 'ग़ालिब' कहते हैं अगले ज़माने में कोई 'मीर' भी था
Mirza Ghalib
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तेरे ख़त आज लतीफ़ों की तरह लगते हैं ख़ूब हँसता हूँ जहाँ लफ़्ज़-ए-वफ़ा आता है
Zubair Ali Tabish
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