ग़ौर से देखो मेरी आँखों में तुम्हें लगता नहीं कि तन्हा हूँ मैं
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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उस को दिल में बिठा कर इल्म हुआ है यारों नूर आँखों का नहीं बढ़ता फ़क़त काजल से
Dhirendra Pratap Singh
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पहले ही बना लेता दुश्मन तो भी रहती तसल्ली लेकिन उस ने दोस्त बना कर सारे राब्ते तोड़े
Dhirendra Pratap Singh
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रौशनी को छोड़ कर आना पड़ा वनवास अपना सब दिए थे ताक में दीपावली हो साथ मिल कर
Dhirendra Pratap Singh
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तभी तो बद-तमीज़ी पर तेरे ग़ुस्सा नहीं आता मुझे मालूम है बिन माँ के लड़के कैसे होते हैं
Dhirendra Pratap Singh
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उस ने भी रक्खा ऑप्शन की तरह जिस की प्रायोरिटी था बनना हमें
Dhirendra Pratap Singh
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