गए ज़माने की चाप जिन को समझ रहे हो वो आने वाले उदास लम्हों की सिसकियाँ हैं
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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याद है 'आनिस' पहले तुम ख़ुद बिखरे थे आईने ने तुम से बिखरना सीखा था
Aanis Moin
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बिखर के फूल फ़ज़ाओं में बास छोड़ गया तमाम रंग यहीं आस-पास छोड़ गया
Aanis Moin
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अजब अंदाज़ से ये घर गिरा है मिरा मलबा मिरे ऊपर गिरा है
Aanis Moin
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था इंतिज़ार मनाएँगे मिल के दीवाली न तुम ही लौट के आए न वक़्त-ए-शाम हुआ
Aanis Moin
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गहरी सोचें लम्बे दिन और छोटी रातें वक़्त से पहले धूप सरों पे आ पहुँची
Aanis Moin
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