गहरी सोचें लम्बे दिन और छोटी रातें वक़्त से पहले धूप सरों पे आ पहुँची
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नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है कुछ दिन शहर में घू में लेकिन अब घर अच्छा लगता है
Nida Fazli
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दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है
Hasrat Mohani
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बहुत दिन से तुम्हें देखा नहीं है, ये आँखों के लिए अच्छा नहीं है
Rahat Indori
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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
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बिखर के फूल फ़ज़ाओं में बास छोड़ गया तमाम रंग यहीं आस-पास छोड़ गया
Aanis Moin
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अजब अंदाज़ से ये घर गिरा है मिरा मलबा मिरे ऊपर गिरा है
Aanis Moin
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उतारा दिल के वरक़ पर तो कितना पछताया वो इंतिसाब जो पहले बस इक किताब पे था
Aanis Moin
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गए ज़माने की चाप जिन को समझ रहे हो वो आने वाले उदास लम्हों की सिसकियाँ हैं
Aanis Moin
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मुमकिन है कि सदियों भी नज़र आए न सूरज इस बार अँधेरा मिरे अंदर से उठा है
Aanis Moin
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