गुल कभी ख़्वाब में दिखा था इक ज़ख़्म पलकों पे खिल रहे हैं अब
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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खिल रहे हैं आजकल जो मेरी पलकों पर नींद उन ख़्वाबों में ही बिखरी पड़ी होगी
Kiran K
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ज़िन्दगी मुस्तक़िल वबाल रही हर घड़ी थी ज़वाल की सूरत
Kiran K
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शब की तमाम कोशिशें बेकार हो गईं कमरा तेरे ख़याल से रौशन बना रहा
Kiran K
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शब-ए-हिज्रां बुझा बैठी हूँ मैं सारे सितारे पर कोई फ़ानूस रौशन है ख़मोशी से मेरे अंदर
Kiran K
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उलझ जाती हूँ अक्सर आईने से मैं तक़ाबुल में जो ख़ुद को देखती हूँ अक्स तेरा ही उभरता है
Kiran K
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