ज़िन्दगी मुस्तक़िल वबाल रही हर घड़ी थी ज़वाल की सूरत
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जहान भर में न हो मुयस्सर जो कोई शाना, हमें बताना नहीं मिले गर कोई ठिकाना तो लौट आना, हमें बताना कुछ ऐसी बातें जो अनकही हों, मगर वो अंदर से खा रही हों लगे किसी को बताना है पर नहीं बताना, हमें बताना
Vikram Gaur Vairagi
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ख़मोशी तो यही बतला रही है उदासी रास मुझ को आ रही है मुझे जिन ग़लतियों से सीखना था वही फिर ज़िंदगी दोहरा रही है
Vishal Singh Tabish
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जो गुज़ारी न जा सकी हम से हम ने वो ज़िन्दगी गुज़ारी है
Jaun Elia
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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कैसे कहूँ दुनिया है ये इंसानों की इंसानियत रुस्वा है जब हर सूँ यहाँ
Kiran K
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ज़िन्दगी रुख़ पर जो तेरे छाई है ये ख़ामुशी आ इसे मैं चीर दूँ पाज़ेब की झंकार से
Kiran K
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खिल रहे हैं आजकल जो मेरी पलकों पर नींद उन ख़्वाबों में ही बिखरी पड़ी होगी
Kiran K
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एक तहरीर जो उस ने लिक्खी थी वो ख़ुशबू बन दिल पे छाई रही रात भर
Kiran K
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चला दूँ इक मुक़दमा गर कहीं मिल जाए फिर से कि मेरा क़त्ल कर के लापता है ज़िंदगानी
Kiran K
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