ज़िन्दगी रुख़ पर जो तेरे छाई है ये ख़ामुशी आ इसे मैं चीर दूँ पाज़ेब की झंकार से
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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एक आवाज़ कि जो मुझ को बचा लेती है ज़िन्दगी आख़री लम्हों में मना लेती है जिस पे मरती हो उसे मुड़ के नहीं देखती वो और जिसे मारना हो यार बना लेती है
Ali Zaryoun
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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हाथ ख़ाली है तेरे शहर से जाते जाते जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते
Rahat Indori
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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ये शाम ख़ुशबू पहन के तेरी ढली है मुझ में जो रेज़ा रेज़ा मैं क़तरा क़तरा पिघल रही हूँ ख़मोश शब के समुंदरों में
Kiran K
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खिल रहे हैं आजकल जो मेरी पलकों पर नींद उन ख़्वाबों में ही बिखरी पड़ी होगी
Kiran K
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ज़िन्दगी मुस्तक़िल वबाल रही हर घड़ी थी ज़वाल की सूरत
Kiran K
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सुब्ह की पहली अज़ाँ में सुन रही हूँ नाम तेरा आजकल मैं मंदिरों की घण्टियाँ भी कब भला इतनी मधुर लगती थीं मुझ को
Kiran K
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शब की तमाम कोशिशें बेकार हो गईं कमरा तेरे ख़याल से रौशन बना रहा
Kiran K
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