ये शाम ख़ुशबू पहन के तेरी ढली है मुझ में जो रेज़ा रेज़ा मैं क़तरा क़तरा पिघल रही हूँ ख़मोश शब के समुंदरों में
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ज़िन्दगी रुख़ पर जो तेरे छाई है ये ख़ामुशी आ इसे मैं चीर दूँ पाज़ेब की झंकार से
Kiran K
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ज़िन्दगी मुस्तक़िल वबाल रही हर घड़ी थी ज़वाल की सूरत
Kiran K
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खिल रहे हैं आजकल जो मेरी पलकों पर नींद उन ख़्वाबों में ही बिखरी पड़ी होगी
Kiran K
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इश्क़ तेरा हो भले औहाम ही साँस लेने की हसीं इक वज्ह है
Kiran K
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उलझ जाती हूँ अक्सर आईने से मैं तक़ाबुल में जो ख़ुद को देखती हूँ अक्स तेरा ही उभरता है
Kiran K
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