हमारी इस नज़र के इस हुनर को मान लेते हैं लगी हो भीड़ फिर भी हम उसे पहचान लेते हैं
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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तेरे जाने से दुनिया भी जुदा है मुझे कितना सताया जा रहा है
NEERAJ SAINI
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उस के जाने से हुआ नुक़सान है ख़ुद गया मेरा सहारा ले गया
NEERAJ SAINI
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ज़ुल्म जो करते हैं ये ज़ेहन में रख लें अपने वक़्त ये अपने को हर-हाल में दोहराता है
NEERAJ SAINI
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समझ लो यही है हक़ीक़त सुकूँ तो अभी भी नहीं है
NEERAJ SAINI
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पलों का बीतना दस्तूर है ये कम भी होते हैं ख़ुशी में खिल रहे चेहरे के पीछे ग़म भी होते हैं
NEERAJ SAINI
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