परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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पड़ी रहने दो इंसानों की लाशें ज़मीं का बोझ हल्का क्यूँँ करें हम
Jaun Elia
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ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
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तपते सहराओं में सब के सर पे आँचल हो गया उस ने ज़ुल्फ़ें खोल दीं और मसअला हल हो गया
Tehzeeb Hafi
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बस तुम्हारा ही नज़ारा हर जगह हूँ देखता आँख है पलकों के पीछे या कहीं तुम हो छिपी
Divya 'Kumar Sahab'
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लगाना बाग़ तो उस में मोहब्बत भी ज़रा रखना परिंदों के बिना कोई शजर पूरा नहीं होता
Shakeel Azmi
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दर्द में शिद्दत-ए-एहसास नहीं थी पहले ज़िंदगी राम का बन-बास नहीं थी पहले
Shakeel Azmi
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कच्ची 'उम्रों में हमें काम पर लगा दिया गया हम वो बच्चे जो जवानी से अलग कर दिए गए
Shakeel Azmi
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आदमी होता है माहौल से अच्छा या बुरा जानवर घर में रखे जाएँ तो इंसान से हैं
Shakeel Azmi
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ख़ुदा ख़ुद को समझते हो तो समझो मगर इक रोज़ मर जाना है तुम को
Shakeel Azmi
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