तपते सहराओं में सब के सर पे आँचल हो गया उस ने ज़ुल्फ़ें खोल दीं और मसअला हल हो गया
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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सहरा से हो के बाग़ में आया हूँ सैर को हाथों में फूल हैं मेरे पाँव में रेत है
Tehzeeb Hafi
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मैं जिस के साथ कई दिन गुज़ार आया हूँ वो मेरे साथ बसर रात क्यूँँ नहीं करता
Tehzeeb Hafi
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इक तेरा हिज्र दाइमी है मुझे वर्ना हर चीज़ आरज़ी है मुझे
Tehzeeb Hafi
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इस लिए रौशनी में ठंडक है कुछ चराग़ों को नम किया गया है
Tehzeeb Hafi
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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा
Tehzeeb Hafi
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