sherKuch Alfaaz
गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा
Tehzeeb Hafi64 Likes







