हर तौर से मैं एक ही मंज़र की तरह हूँ देखो मुझे बाहरस भी अंदर की तरह हूँ हर रोज़ बदलता है मेरी सोच का मौसम शीशा न मुझे जान मैं पत्थर की तरह हूँ
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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ज़र्फ़ दरकार है यारो ये कोई खेल नहीं ज़ोरे सैलाब को आँखों में छुपा कर रखना
Altaf Iqbal
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अहदे माज़ी में थे ग़ालिब, दोस्तों देखो ज़रा नाम अपना भी कहीं पर दर्ज मुस्तक़बिल में है
Altaf Iqbal
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जहाँ अहसास के पैरों में अक्सर ज़ख़्म आते हैं उन्हीं राहों पे हम यारो टहल के शे'र कहते हैं
Altaf Iqbal
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उस मोड़ पे गुज़री है मेरी ज़िन्दगी 'अल्ताफ़' जिस मोड़ पे पल भर कोई ठहरा नहीं करते
Altaf Iqbal
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इश्क़-ए-अहमद जिसे मुयस्सर नईं ख़ुल्द भी उस का फिर मुक़द्दर नईं आप की सोहबतों के सदक़े में क्या है वो चीज़ जो मुअत्तर नईं
Altaf Iqbal
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