अहदे माज़ी में थे ग़ालिब, दोस्तों देखो ज़रा नाम अपना भी कहीं पर दर्ज मुस्तक़बिल में है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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ज़र्फ़ दरकार है यारो ये कोई खेल नहीं ज़ोरे सैलाब को आँखों में छुपा कर रखना
Altaf Iqbal
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उस मोड़ पे गुज़री है मेरी ज़िन्दगी 'अल्ताफ़' जिस मोड़ पे पल भर कोई ठहरा नहीं करते
Altaf Iqbal
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सफ़ीने को सुख़न के डूब जाने से बचा मौला के नाशायर यहाँ पर अब ग़ज़ल के शे'र कहते हैं
Altaf Iqbal
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पलकों पे कुछ चराग़-ए-तमन्ना लिए हुए आँखों को ख़्वाब-ए-सुबह दिखाता रहा हूँ मैं
Altaf Iqbal
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ख़ुद अपनी ज़ात में महसूर हो गया हूँ मैं ये ज़ख़्म कौन सा है जिस में मुब्तिला हूँ मैं सज़ा है जब से मेरे सर पे ताज शोहरत का हर एक शख़्स की आँखों में खल रहा हूँ मैं
Altaf Iqbal
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