सफ़ीने को सुख़न के डूब जाने से बचा मौला के नाशायर यहाँ पर अब ग़ज़ल के शे'र कहते हैं
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राम कथा में जाने वाले लाखों लोग राम के जैसा बनने वाला एक नहीं
Tanoj Dadhich
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जा तुझे जाने दिया जानाँ मेरी जानाँ जान अब तू हो गई अनजान हो जैसे
nakul kumar
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न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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तेरी ख़ता नहीं जो तू ग़ुस्से में आ गया पैसे का ज़ो'म था तेरे लहजे में आ गया सिक्का उछालकर के तेरे पास क्या बचा तेरा ग़ुरूर तो मेरे काँसे में आ गया
Mehshar Afridi
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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पलकों पे कुछ चराग़-ए-तमन्ना लिए हुए आँखों को ख़्वाब-ए-सुबह दिखाता रहा हूँ मैं
Altaf Iqbal
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ज़र्फ़ दरकार है यारो ये कोई खेल नहीं ज़ोरे सैलाब को आँखों में छुपा कर रखना
Altaf Iqbal
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ख़ुद अपनी ज़ात में महसूर हो गया हूँ मैं ये ज़ख़्म कौन सा है जिस में मुब्तिला हूँ मैं सज़ा है जब से मेरे सर पे ताज शोहरत का हर एक शख़्स की आँखों में खल रहा हूँ मैं
Altaf Iqbal
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इश्क़-ए-अहमद जिसे मुयस्सर नईं ख़ुल्द भी उस का फिर मुक़द्दर नईं आप की सोहबतों के सदक़े में क्या है वो चीज़ जो मुअत्तर नईं
Altaf Iqbal
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जहाँ अहसास के पैरों में अक्सर ज़ख़्म आते हैं उन्हीं राहों पे हम यारो टहल के शे'र कहते हैं
Altaf Iqbal
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