पलकों पे कुछ चराग़-ए-तमन्ना लिए हुए आँखों को ख़्वाब-ए-सुबह दिखाता रहा हूँ मैं
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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ज़िंदगी भर के लिए दिल पे निशानी पड़ जाए बात ऐसी न लिखो, लिख के मिटानी पड़ जाए
Aadil Rasheed
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ख़ुद को इतना भी मत बचाया कर बारिशें हों तो भीग जाया कर काम ले कुछ हसीन होंठों से बातों बातों में मुस्कुराया कर
Shakeel Azmi
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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ज़र्फ़ दरकार है यारो ये कोई खेल नहीं ज़ोरे सैलाब को आँखों में छुपा कर रखना
Altaf Iqbal
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सानेहा ऐसा गुज़र जाए तो फिर शे'र कहें उन की सुरत जो नज़र आए तो फिर शे'र कहें बस यही शेवा हमारा है के हम अहले जूनू दर्द की हद से गुज़र जाए तो फिर शे'र कहें
Altaf Iqbal
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ख़ुद अपनी ज़ात में महसूर हो गया हूँ मैं ये ज़ख़्म कौन सा है जिस में मुब्तिला हूँ मैं सज़ा है जब से मेरे सर पे ताज शोहरत का हर एक शख़्स की आँखों में खल रहा हूँ मैं
Altaf Iqbal
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सफ़ीने को सुख़न के डूब जाने से बचा मौला के नाशायर यहाँ पर अब ग़ज़ल के शे'र कहते हैं
Altaf Iqbal
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ये मत पूछो के हसरत हम ने इस दिल की कहाँ रख दी हमारी चीज़ थी हम ने जहाँ चाही वहाँ रख दी
Altaf Iqbal
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