हसीन तो था बड़ा लेकिन एक सपना ही था जो मुझ को छोड़ गया वो भी मेरा अपना ही था
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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वहीं पर मैं मरूँगा जिस जगह गाहे किसी को देख कर मुँह फेरा हो तू ने
Jagat Singh
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तुम्हारा मेरी नाकामी से वाक़िफ़ होना बेहद ही ज़रूरी है तुम्हारा क़ामयाबी पर मेरी हैरान होने के लिए जानाँ
Jagat Singh
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किसी को भी बिना बोले पता नहीं चलता कहीं पे कोई उन्हें सच्चा इश्क़ करता है
Jagat Singh
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जिस को अपना ग़म सुना दूँ सुन के ग़म फिर हँसता है वो
Jagat Singh
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हवा में हिस्से करने पड़ गए हमें ज़मीन पर ज़मीन ही नहीं बची दया दिलों में प्रीत और धीर बस जहान में ये तीन ही नहीं बची
Jagat Singh
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