हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं
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हज़ारों मन्नतों पर भी कोई बोसा नहीं मिलता किसी सूरत में उस कंजूस के बटुए नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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पलक का बाल गिरे कब मैं कब तुझे माँगूँ मैं कशमकश में ये पलकें न नोच लूँ अपनी
Vishnu virat
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लाखों सद में ढेरों ग़म फिर भी नहीं हैं आँखें नम इक मुद्दत से रोए नहीं क्या पत्थर के हो गए हम
Azm Shakri
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बंद कमरे में हज़ारों मील अब चलते हैं हम काफ़ी महँगी पड़ रही है शा'इरी से दोस्ती
Ashraf Jahangeer
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मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया बर्क़ सी गिर गई काम ही कर गई आग ऐसी लगाई मज़ा आ गया
Fana Bulandshahri
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किस दर्जा दिल-शिकन थे मोहब्बत के हादसे हम ज़िंदगी में फिर कोई अरमाँ न कर सके
Sahir Ludhianvi
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बस अब तो दामन-ए-दिल छोड़ दो बेकार उम्मीदो बहुत दुख सह लिए मैं ने बहुत दिन जी लिया मैं ने
Sahir Ludhianvi
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फिर खो न जाएँ हम कहीं दुनिया की भीड़ में मिलती है पास आने की मोहलत कभी कभी
Sahir Ludhianvi
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यूँँही दिल ने चाहा था रोना-रुलाना तिरी याद तो बन गई इक बहाना
Sahir Ludhianvi
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माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके कुछ ख़ार कम तो कर गए गुज़रे जिधर से हम
Sahir Ludhianvi
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