हूँ मुश्त-ए-ख़ाक तू उपकार कर दे हक़ीक़त का मुझे हक़दार कर दे शिकायत-गर भी करते हैं तशक्कुर तू जिस की ज़िंदगी हमवार कर दे
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ज़माने को ज़रूरत है मोहब्बत की मुरव्वत की मगर हम ने तो नफ़रत के सिवा दिल में रखा क्या है
Manish Pithaya
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उठी थी आग चिंगारी से देखो लगी थी शक कि बीमारी से देखो कि दानाई को तुम रक्खो परे अब निभा के तुम भी दिलदारी से देखो
Manish Pithaya
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तेरी सिखलाई सँवारे ज़िंदगानी और किरदारों की ये बदले कहानी
Manish Pithaya
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ज़िंदगी तू बदल गई लेकिन हम से क्या हो सका मोहब्बत में
Manish Pithaya
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ईंट का उत्तर अगर पत्थर है तो हैवानियत है जो ख़ुदा को देख पाया सब में तो रूहानियत है धर्म इक ख़ुशबू है जिस सेे है महकता ये जहाँ है जान ले इंसाँ अगर ईमान तो इंसानियत है
Manish Pithaya
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