हम चाहते थे मौत ही हम को जुदा करे अफ़्सोस अपना साथ वहाँ तक नहीं हुआ
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तुम्हारे पाँव क़सम से बहुत ही प्यारे हैं ख़ुदा करे मेरे बच्चों की इन में जन्नत हो
Rafi Raza
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दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता तुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता
Waseem Barelvi
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मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यूँँ रात भर नहीं आती
Mirza Ghalib
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क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं
Jaun Elia
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जुदा हुए हैं बहुत लोग एक तुम भी सही अब इतनी बात पे क्या ज़िंदगी हराम करें
Nasir Kazmi
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तेरे बग़ैर भी कहती है मुझ से जीने को ये ज़िंदगी भी सही मशवरा नहीं देती
Waseem Nadir
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बस एक रस्म-ए-तअल्लुक़ निभाने बैठे हैं वगरना दोनों के कप में ज़रा भी चाय नहीं
Waseem Nadir
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रूमाल ले लिया है किसी माह-जबीन से कब तक पसीना पोंछते हम आस्तीन से ये आँसुओं के दाग़ हैं, आँसू ही धोएँगे ये दाग़ धुल न पाएँगे वाशिंग मशीन से
Waseem Nadir
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