हमारी आख़िरी सिगरेट थी ये अरे दुनिया जो तुझ पे ग़ुस्से में हम ने अभी जला ली है
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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मेरी दुनिया उजड़ गई इस में तुम इसे हादसा समझते हो आख़िरी रास्ता तो बाक़ी है आख़िरी रास्ता समझते हो
Himanshi babra KATIB
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ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
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वो जो पागल था अब वो कैसा है ऐसे वो पूछता है हाल मेरा
Swapnil Tiwari
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गली में बैठे हैं उस की नज़र जमाए हुए हमारे बस में फ़क़त इंतिज़ार करना है
Swapnil Tiwari
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ये वही हूँ मैं वो ही हारा हुआ फिर वही दिन है वो गुज़ारा हुआ कैसे अपनी तरफ़ चला आया मैं किसी और का पुकारा हुआ
Swapnil Tiwari
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ये ज़िंदगी जो पुकारे तो शक सा होता है कहीं अभी तो मुझे ख़ुद-कुशी नहीं करनी
Swapnil Tiwari
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जलते दिए सा इक बोसा रख कर उस ने चमक बढ़ा दी है मेरी पेशानी की
Swapnil Tiwari
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