इंसाँ के रग से ख़ूँ बहाए जिस ने कल डर तक न थी चेहरे पे उस ख़ूँ-ख़ार के
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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वो मेरे चेहरे तक अपनी नफरतें लाया तो था मैं ने उस के हाथ चू में और बेबस कर दिया
Waseem Barelvi
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तेरी आँखों में जो इक क़तरा छुपा है, मैं हूँ जिस ने छुप छुप के तेरा दर्द सहा है, मैं हूँ एक पत्थर कि जिसे आँच न आई, तू है एक आईना कि जो टूट चुका है, मैं हूँ
Fauziya Rabab
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मुस्कान उस ने छीन ली लब से मिरे मैं धुन सुनाया करता था जिस प्यार के
Shams Amiruddin
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यूँँ मोहब्बत की क़सम खा बिछड़े वहाँ इक अलग दुनिया बसाई हम ने जहाँ मुझ से डरती है मेरी परछाई भी अब सो है मेरे साथ बस तन्हाई यहाँ
Shams Amiruddin
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सुनो न जान मेरी आज शाम तुम ठहर जाओ शराब की मिरी ये तिश्नगी बुझा के घर जाओ
Shams Amiruddin
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दौलत भी शोहरत भी निछावर तुझ पे सब रस्म-ए-मोहब्बत तुम निभाओ तो सही
Shams Amiruddin
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हर रंग देखे मैं ने उस गुल-ख़ार के जितने चुराए रंग लब से यार के
Shams Amiruddin
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