इस जहाँ के सारे मंज़र उस की आँखों से छुए उस ने नज़रें फेर लीं तो मैं भी अंधा हो गया धीरे धीरे हो गई मसरूफ़ अपनी ज़िंदगी रफ़्ता रफ़्ता आशिक़ी का शौक़ पूरा हो गया
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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गुनाहगार को इतना पता तो होता है जहाँ कोई नहीं होता ख़ुदा तो होता है
Waseem Barelvi
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है कुछ दिन शहर में घू में लेकिन अब घर अच्छा लगता है
Nida Fazli
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उन दरख़्तों से दूर हो जाओ जिन दरख़्तों में छाँव होती है
ZARKHEZ
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वो एक लम्हा जो बेदारियों का ज़ामिन है जब आँख लगने लगे तब अज़ान देता है
ZARKHEZ
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मैं तुम्हें अपनी हसरतें दूँगा उन को अरमान तुम बना लेना
ZARKHEZ
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हमारी आँख में पहले तो मिट्टी झोंक जाएँगे वही फिर काँच के आँसू इकट्ठे करने आएँगे अगर ज़ाहिर करूँँगा आसमाँ पर ख़्वाहिशें अपनी मुझे इस बात का डर है सितारे टूट जाएँगे
ZARKHEZ
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तुम्हें छूने को हूँ बेताब लेकिन हक़ीक़त हाथ में उलझी हुई है
ZARKHEZ
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