तुम्हें छूने को हूँ बेताब लेकिन हक़ीक़त हाथ में उलझी हुई है
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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उन दरख़्तों से दूर हो जाओ जिन दरख़्तों में छाँव होती है
ZARKHEZ
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आप की महफ़िल में सब थे ख़ामुशी पहने हुए मेरे आते ही तमाशा-गर तमाशा किस लिए
ZARKHEZ
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हमारी आँख में पहले तो मिट्टी झोंक जाएँगे वही फिर काँच के आँसू इकट्ठे करने आएँगे अगर ज़ाहिर करूँँगा आसमाँ पर ख़्वाहिशें अपनी मुझे इस बात का डर है सितारे टूट जाएँगे
ZARKHEZ
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मैं अपने घर के सभी रास्तों को भूल गया तेरे बदन का हर इक तिल शुमार करते हुए
ZARKHEZ
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वो एक लम्हा जो बेदारियों का ज़ामिन है जब आँख लगने लगे तब अज़ान देता है
ZARKHEZ
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