इसी दुनिया में दिखा दें तुम्हें जन्नत की बहार शैख़ जी तुम भी ज़रा कू-ए-बुताँ तक आओ
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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परतव से जिस के आलम-ए-इम्काँ बहार है वो नौ-बहार-ए-नाज़ अभी रहगुज़र में है
Ali Sardar Jafri
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शब के सन्नाटे में ये किस का लहू गाता है सरहद-ए-दर्द से ये किस की सदा आती है
Ali Sardar Jafri
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मक़तल-ए-शौक़ के आदाब निराले हैं बहुत दिल भी क़ातिल को दिया करते हैं सर से पहले
Ali Sardar Jafri
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ये तेरा गुलिस्ताँ तेरा चमन कब मेरी नवा के क़ाबिल है नग़्मा मिरा अपने दामन में आप अपना गुलिस्ताँ लाता है
Ali Sardar Jafri
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इसी लिए तो है ज़िंदाँ को जुस्तुजू मेरी कि मुफ़लिसी को सिखाई है सर-कशी मैं ने
Ali Sardar Jafri
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