ये तेरा गुलिस्ताँ तेरा चमन कब मेरी नवा के क़ाबिल है नग़्मा मिरा अपने दामन में आप अपना गुलिस्ताँ लाता है
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है
Charagh Sharma
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रख के हर चीज़ भूलने वाली ला तेरा दिल सँभाल कर रख दूँ
Kumar Vishwas
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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परतव से जिस के आलम-ए-इम्काँ बहार है वो नौ-बहार-ए-नाज़ अभी रहगुज़र में है
Ali Sardar Jafri
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इसी लिए तो है ज़िंदाँ को जुस्तुजू मेरी कि मुफ़लिसी को सिखाई है सर-कशी मैं ने
Ali Sardar Jafri
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शिकायतें भी बहुत हैं हिकायतें भी बहुत मज़ा तो जब है कि यारों के रू-ब-रू कहिए
Ali Sardar Jafri
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इंक़लाब आएगा रफ़्तार से मायूस न हो बहुत आहिस्ता नहीं है जो बहुत तेज़ नहीं
Ali Sardar Jafri
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ये मय-कदा है यहाँ हैं गुनाह जाम-ब-दस्त वो मदरसा है वो मस्जिद वहाँ मिलेगा सवाब
Ali Sardar Jafri
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