इसी लिए हमें एहसास-ए-जुर्म है शायद अभी हमारी मोहब्बत नई नई है ना
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ये सोच कर के वो खिड़की से झाँक ले शायद गली में खेलते बच्चे लड़ा दिए मैं ने
Unknown
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ज़िंदगी भर वो उदासी के लिए काफ़ी है एक तस्वीर जो हँसते हुए खिंचवाई थी
Yasir Khan
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ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबें इक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैं
Jaan Nisar Akhtar
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मौत का भी इलाज हो शायद ज़िंदगी का कोई इलाज नहीं
Firaq Gorakhpuri
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साल के आख़िरी दिन उस ने दिया वक़्त हमें अब तो ये साल कई साल नहीं गुज़रेगा
Shariq Kaifi
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दानिस्ता मुझ आवारा से टकरा के ये दुनिया कहती है कि अंधे हो दिखाई नहीं देता
Afzal Khan
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बना रक्खी हैं दीवारों पे तस्वीरें परिंदों की वगर्ना हम तो अपने घर की वीरानी से मर जाएँ
Afzal Khan
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तेरे जाने से ज़्यादा हैं न कम पहले थे हम को लाहक़ हैं वही अब भी जो ग़म पहले थे
Afzal Khan
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जाने क्या क्या ज़ुल्म परिंदे देख के आते हैं शाम ढले पेड़ों पर मर्सिया-ख़्वानी होती है
Afzal Khan
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हमारे साँस भी ले कर न बच सके अफ़ज़ल ये ख़ाक-दान में दम तोड़ते हुए सिगरेट
Afzal Khan
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