जाते जाते कह दूँगा उस को ये में ख़ुद से हर दिन कहता हूँ
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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इसीलिए तो सब सेे ज़्यादा भाती हो कितने सच्चे दिल से झूठी क़स में खाती हो
Tehzeeb Hafi
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किस लिए देखती हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो
Jaun Elia
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तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया
Tehzeeb Hafi
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ज़िन्दगी में कभी नहीं करना ये मोहब्बत अभी नहीं करना अब तुझे छू सकें नहीं मुमकिन तुम तवक़्क़ो अभी नहीं करना
Jasmeet singh 'Meet'
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राह जो इश्क़ की तरफ़ चलती में बदल लेता था कदम अपने
Jasmeet singh 'Meet'
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जान जाती तो ले आते बात ये है तुम चले हो
Jasmeet singh 'Meet'
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तुम मुझ सेे महरूम जो थे तुम में बस ये ही कमी थी
Jasmeet singh 'Meet'
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गुलाल मत लगवाना उस रक़ीब से जाना उस ने छूना है तेरे होंटों को जाना
Jasmeet singh 'Meet'
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