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जश्न, शोक, जो कुछ भी हो मनाना पड़ता है जैसे हम नहीं हों वैसे दिखाना पड़ता है एक दिन ख़ुशी से जो बीत जाए तो हम को चार दिन दुखी हो कर के चुकाना पड़ता है

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उलझे रहो तुम और हाथी घोड़े में इक प्यादा रानी बन के राजा ले गई

Harsh Raj

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उलझे रहो तुम और हाथी घोड़े में इक प्यादा रानी बन के राजा ले गई

Harsh Raj

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तुम्हीं मेरा सवाल हो तुम्हीं मेरा जवाब भी मिले जवाब इक दफा तो लिख दूँ मैं किताब भी नहीं हो शक उसे सो पीला दे दिया गुलाब,पर उसे तो देख कर गुलाबी हो गया गुलाब भी

Harsh Raj

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मेरी हीर से तुम शिकायत करोगे मेरे दोस्त मुझ सेे बग़ावत करोगे तुम्हें है पता फिर भी पीछे पड़े हो इरादा है क्या जी अदावत करोगे

Harsh Raj

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ये मत समझो किया इग्नोर हर इतवार मैं ने झिझक की वजह से तुझ को किया इनकार मैं ने ख़ुदा ने ही कहा है फल की चिंता मत किया कर ख़ुदा का नाम ले के कर दिया इजहार मैं ने

Harsh Raj

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