जिन पत्थरों को हम ने अता की थीं धड़कनें उन को ज़बाँ मिली तो हमीं पर बरस पड़े
sherKuch Alfaaz
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मैं क्या बताऊँ वो कितना क़रीब है मेरे मेरा ख़याल भी उस को सुनाई देता है वो जिस ने आँख अता की है देखने के लिए उसी को छोड़ के सब कुछ दिखाई देता है
Zubair Ali Tabish
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क़ुबूल है जिन्हें ग़म भी तेरी ख़ुशी के लिए वो जी रहे हैं हक़ीक़त में ज़िन्दगी के लिए
Nasir Kazmi
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ख़ुशी से काँप रही थीं ये उँगलियाँ इतनी डिलीट हो गया इक शख़्स सेव करने में
Fahmi Badayuni
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मेरी दुआ है और इक तरह से बद-दुआ भी है ख़ुदा तुम्हें तुम्हारे जैसी बेटियाँ अता करे
Tehzeeb Hafi
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दिल्ली में आज भीक भी मिलती नहीं उन्हें था कल तलक दिमाग़ जिन्हें ताज-ओ-तख़्त का
Meer Taqi Meer
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