जिन को पनाह नहीं मिलती है बाँहों में रक़्स किया करते हैं वो सहराओं में
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ज़ख़्म ऐसा दो मुझे अब इश्क़ में, के नील ही पड़ जाए मेरे दिल के अंदर
Dipendra Singh 'Raaz'
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मैं कैसे चैन से सोऊँ यहाँ पर तेरी यादों से कमरा भर गया है
Dipendra Singh 'Raaz'
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सितारा ही तो कहती थी मुझे तुम दुआएंँ माँग लो टूटा हुआ हूँ
Dipendra Singh 'Raaz'
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होते हुए तुम्हारे भी तरसे हैं प्यार को सूखा रहा है शहर ये बारिश के बा'द भी
Dipendra Singh 'Raaz'
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तुम्हारे इश्क़ से मुझ को अता हुए थे जो तमाम ज़ख़्म वो मैं ने सदा हरे रक्खे
Dipendra Singh 'Raaz'
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