जिस रात ख़ुद-कुशी के मुझे आए थे ख़याल उस रात मैं ने शे'र कहे और सो गया
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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जब राह झूठ की चुनी तो लिफ़्ट भी मिली और सच की राह में मिले पैरों के बस निशाँ
Tanoj Dadhich
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अब उस के हाथ पीले हो गए हैं नहीं पीछे पड़ेगी हाथ धो कर
Tanoj Dadhich
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ख़ुद-कुशी पर शे'र लिखना है अगर तो लिखो ऐसा कभी करना नहीं
Tanoj Dadhich
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पहुँचते ही नहीं हैं शे'र उन तक हमें मशहूर होना पड़ रहा है
Tanoj Dadhich
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ख़ुदा के लिए अब न उस सेे मिलो तुम तुम्हें अब हमारी जलन की क़सम है
Tanoj Dadhich
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