jo dil rakhte hain sine mein wo kafir ho nahin sakte mohabbat din hoti hai wafa iman hoti hai
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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आरज़ू' जाम लो झिजक कैसी पी लो और दहशत-ए-गुनाह गई
Arzoo Lakhnavi
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हद से टकराती है जो शय वो पलटती है ज़रूर ख़ुद भी रोएँगे ग़रीबों को रुलाने वाले
Arzoo Lakhnavi
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जो दिल रखते हैं सीने में वो काफ़िर हो नहीं सकते मोहब्बत दीन होती है वफ़ा ईमान होती है
Arzoo Lakhnavi
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ख़मोशी मेरी मअनी-ख़ेज़ थी ऐ आरज़ू कितनी कि जिस ने जैसा चाहा वैसा अफ़्साना बना डाला
Arzoo Lakhnavi
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कुछ तो मिल जाए लब-ए-शीरीं से ज़हर खाने की इजाज़त ही सही
Arzoo Lakhnavi
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