jo kuchh tha na kahne ka sab kah gaya diwana samho to mukammal hai ab ishq ka afsana
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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आरज़ू' जाम लो झिजक कैसी पी लो और दहशत-ए-गुनाह गई
Arzoo Lakhnavi
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हद से टकराती है जो शय वो पलटती है ज़रूर ख़ुद भी रोएँगे ग़रीबों को रुलाने वाले
Arzoo Lakhnavi
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जो दिल रखते हैं सीने में वो काफ़िर हो नहीं सकते मोहब्बत दीन होती है वफ़ा ईमान होती है
Arzoo Lakhnavi
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ख़मोशी मेरी मअनी-ख़ेज़ थी ऐ आरज़ू कितनी कि जिस ने जैसा चाहा वैसा अफ़्साना बना डाला
Arzoo Lakhnavi
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कुछ तो मिल जाए लब-ए-शीरीं से ज़हर खाने की इजाज़त ही सही
Arzoo Lakhnavi
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