कब तलक वो याद आएगी मुझे भी कब तलक बस शा'इरी से काम होगा
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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हम को यारों ने याद भी न रखा 'जौन' यारों के यार थे हम तो
Jaun Elia
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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
Bashir Badr
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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उसे तर्क-ए-मोहब्बत से नहीं कोई परेशानी इसी इक बात ने दिल में परेशानी बढ़ाई है
Amanpreet singh
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उसे मुझ सेे शिकायत एक ये भी थी मुझे उस सेे मोहब्बत ही हुई थी क्यूँ
Amanpreet singh
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मुझे अब याद सी आ तो रही है आप की बातें तो अच्छा इस लिए कहते थे मिलना ठीक रहता हैं
Amanpreet singh
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वही फिर बात होने से ख़फ़ा हो तुम वहीं फिर बात करने की मुआ'फ़ी है
Amanpreet singh
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करो जब बे-वफ़ाई तो न उसपर तुम ज़रा सा मुस्कुरा दो और काफ़ी है
Amanpreet singh
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