kabhi to dair-o-haram se tu aaega wapas main mai-kade mein tera intizar kar lunga
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निगाहें फेर ली घबरा के मैं ने वो तुम से ख़ूब-सूरत लग रही थी
Fahmi Badayuni
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मैं जब मर जाऊँ तो मेरी अलग पहचान लिख देना लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना
Rahat Indori
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तुम्हारे नाम की हर लड़की से मिला हूँ मैं तुम्हारा नाम फ़क़त तुम पे अच्छा लगता है
Unknown
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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बढ़ के तूफ़ान को आग़ोश में ले ले अपनी डूबने वाले तिरे हाथ से साहिल तो गया
Abdul Hamid Adam
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फिर आज 'अदम' शाम से ग़मगीं है तबीअत फिर आज सर-ए-शाम मैं कुछ सोच रहा हूँ
Abdul Hamid Adam
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दिल अभी पूरी तरह टूटा नहीं दोस्तों की मेहरबानी चाहिए
Abdul Hamid Adam
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कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटती नहीं जा मय-कदे से मेरी जवानी उठा के ला
Abdul Hamid Adam
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हद से बढ़ कर हसीन लगते हो झूटी क़स में ज़रूर खाया करो
Abdul Hamid Adam
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