कल अपने-आप को देखा था माँ की आँखों में ये आईना हमें बूढ़ा नहीं बताता है
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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रुक गया है वो या चल रहा है हम को सब कुछ पता चल रहा है उस ने शादी भी की है किसी से और गाँव में क्या चल रहा है
Tehzeeb Hafi
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इंसानों को जलवाएगी कल इस से ये दुनिया जो बच्चा खिलौना भी ज़मीं पर नहीं रखता
Munawwar Rana
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सज़ा कितनी बड़ी है गाँव से बाहर निकलने की मैं मिट्टी गूँधता था अब डबलरोटी बनाता हूँ
Munawwar Rana
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वो ज़ालिम मेरी हर ख़्वाहिश ये कह कर टाल जाता है दिसंबर जनवरी में कोई नैनीताल जाता है?
Munawwar Rana
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ख़ामुशी कब चीख़ बन जाए किसे मालूम है ज़ुल्म कर लो जब तलक ये बे-ज़बानी और है
Munawwar Rana
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ये सच है नफ़रतों की आग ने सब कुछ जला डाला मगर उम्मीद की ठण्डी हवाएँ रोज़ आती हैं
Munawwar Rana
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