कर भी रहा है मुश्किलों से बाप बेटी को विदा है दायज़ा का बोझ जो दिल से नहीं जा पा रहा
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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जहाँ तक मुझ सेे मतलब है जहाँ को वही तक मुझ को पूछा जा रहा है ज़माने पर भरोसा करने वालों भरोसे का ज़माना जा रहा है
Naeem Akhtar Khadimi
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जनाज़े पर मेरे लिख देना यारों मोहब्बत करने वाला जा रहा है
Rahat Indori
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तुम लोग बस ऐसे उठा लेना जनाज़ा ये मिरा जैसे किसी डोली में दुल्हन को उठा कर चलते हैं
Sagar Sahab Badayuni
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वो ख़्वाब भी जिस का मुझे आता नहीं दिल से कभी जो भी गया आता नहीं
Sagar Sahab Badayuni
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यहाँ पर मसअला मुश्किल नहीं होता जुदा करना कभी तो आशिक़ों के हाल पर जा कर दुआ करना
Sagar Sahab Badayuni
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हम सेे दिल से उस ने सिर्फ़ रिहाई माँगी दिल रोया हँस कर आज़ाद किया पर हम ने
Sagar Sahab Badayuni
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था उसे मालूम मिलना आख़िरी होगा हमारा रुख़्सती के वक़्त वापस जो निशानी दे रहा है
Sagar Sahab Badayuni
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