ख़ुदा ही जानता है अपनी मर्ज़ी वो किस कतरे को कब दरिया करेगा
Related Sher
शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
839 likes
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
594 likes
गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
575 likes
मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
566 likes
हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
563 likes
More from Gulshan
जब भी मिलते हैं तहे दिल से दुआ देते हैं ऐसे होते हैं मोहब्बत को निभाने वाले
Gulshan
0 likes
भूखे थे और भूखे ही रह जाएँगे मर जाएँगे हाथ नहीं फैलाएँगे
Gulshan
1 likes
सफ़र को बीच में हम छोड़कर वापस चले आते इशारा लौट आने का किसी ने तो किया होता
Gulshan
10 likes
छोड़ रहे हो अच्छा है तुम तो ये भी कर सकते हो मैं तो जिस से मिल जाता हूँ साथ निभाने लगता हूँ
Gulshan
5 likes
तुझे पाकर ज़माने की वफ़ा अच्छी नहीं लगती सिवा तेरे किसी की भी अदा अच्छी नहीं लगती
Gulshan
8 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Gulshan.
Similar Moods
More moods that pair well with Gulshan's sher.







