सफ़र को बीच में हम छोड़कर वापस चले आते इशारा लौट आने का किसी ने तो किया होता
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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जो दुनिया को सुनाई दे उसे कहते हैं ख़ामोशी जो आँखों में दिखाई दे उसे तूफ़ान कहते हैं
Rahat Indori
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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जब भी मिलते हैं तहे दिल से दुआ देते हैं ऐसे होते हैं मोहब्बत को निभाने वाले
Gulshan
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मुरझा गया गुलाब तो अफ़सोस ये हुआ नाहक़ जुदा किया उसे शाख़ों से तोड़ कर
Gulshan
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तुझे पाकर ज़माने की वफ़ा अच्छी नहीं लगती सिवा तेरे किसी की भी अदा अच्छी नहीं लगती
Gulshan
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ख़ुद से नाराज़ ज़माने से ख़फ़ा रहते हैं जाने क्या सोच के हम सब से जुदा रहते हैं
Gulshan
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मैं अपने ज़ख़्म गर दिखा दूँ ना तो तुम भी इश्क़ से तौबा कर लो
Gulshan
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