किसी के झूठ से पर्दा हटाकर हमारा सच बहुत रोया था उस दिन
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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मुझे इक बात कहनी थी अगर मुझ को इजाज़त हो तुम्हीं मेरी मुहब्बत हो मुहब्बत हो मुहब्बत हो
Shadab Asghar
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हम को जिन से इश्क़ था ना उन को हम सेे था नहीं वरना हम वो आशिक़ी करते के दुनिया देखती
Shadab Asghar
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मैं उस के पास आने में लगा हूँ वो मुझ सेे दूर होता जा रहा है
Shadab Asghar
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मैं उस से भीख माँगूं तो मोहब्बत मिल भी सकती है मगर कहती है ख़ुद्दारी मोहब्बत भीख की और तू
Shadab Asghar
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देखो मौत का मौसम आने वाला है ज़िंदा रहना सब सेे बड़ी लड़ाई है
Shadab Asghar
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