हम को जिन से इश्क़ था ना उन को हम सेे था नहीं वरना हम वो आशिक़ी करते के दुनिया देखती
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आज हम दोनों को फ़ुर्सत है, चलो इश्क़ करें इश्क़ दोनों की ज़रूरत है, चलो इश्क़ करें
Rahat Indori
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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अब फ़क़त साँसे बचीं हैं दोस्तों हम तो कब का ज़िंदगी से मर गए
Shadab Asghar
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तुम इन लबों की हँसी और ख़ुशी पे मत जाना ये रोज़ रोज़ हमें भी फ़रेब देते हैं
Shadab Asghar
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ये जो कुछ लोग कुछ भी लिखते हैं तुम इसे शा'इरी नहीं समझो
Shadab Asghar
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किसी के झूठ से पर्दा हटाकर हमारा सच बहुत रोया था उस दिन
Shadab Asghar
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मैं उस के पास आने में लगा हूँ वो मुझ सेे दूर होता जा रहा है
Shadab Asghar
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