किसी भी वक़्त अब तो टूट सकती है तुम्हारी याद की ये अलगनी जानाँ
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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इसीलिए तो सब सेे ज़्यादा भाती हो कितने सच्चे दिल से झूठी क़स में खाती हो
Tehzeeb Hafi
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे? तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
Kumar Vishwas
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ज़िंदगी भी ख़त्म होती ही नहीं और ये उदासी जान लेने पर तुली है
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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तुम्हारे बिन नहीं लेते कभी करवट अकेले हम तुम्हारी याद भी करवट हमारे साथ लेती है
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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ज़िंदगी तो ज़िंदगी इस मौत पर अब ख़ुदा से ही शिकायत हो रही लग गया हूँ काम पर जब से तिरे साथ रहमत और बरकत हो रही
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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सड़क चौक रस्ते सभी हैं वहीं पर हुआ अजनबी कोई तो यार तुम हो यही सामने बोलता हूँ सभी के मिरा प्यार तुम हो मिरा प्यार तुम हो
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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हमें तो मौत भी आती नहीं और उदासी जान लेने पर तुली है
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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