किसी की तपिश में ख़ुशी है किसी की किसी की ख़लिश में मज़ा है किसी का
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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जैसे तुम ने वक़्त को हाथ में रोका हो सच तो ये है तुम आँखों का धोख़ा हो
Tehzeeb Hafi
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टकरा गया वो मुझ से किताबें लिए हुए फिर मेरा दिल और उस की किताबें बिखर गईं
Unknown
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लगता है कई रातों का जागा था मुसव्विर तस्वीर की आँखों से थकन झाँक रही है
Unknown
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चल दिए घर से तो घर नहीं देखा करते जाने वाले कभी मुड़ कर नहीं देखा करते सीपियाँ कौन किनारे से उठा कर भागा ऐसी बातें समुंदर नहीं देखा करते
Unknown
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ज़िंदगी भर की हिफ़ाज़त की क़सम खाते हुए भाई के हाथ पे इक बहन ने राखी बाँधी
Unknown
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अच्छी सूरत को सँवरने की ज़रूरत क्या है सादगी में भी क़यामत की अदा होती है
Unknown
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