किसी को न शिकवा शिकायत रहे सभी को सभी से मोहब्बत रहे तिरंगे के नीचे रहें अम्न से ख़ुदाया तिरंगा सलामत रहे
Related Sher
उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
361 likes
तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
339 likes
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
388 likes
सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
545 likes
More from Shadab Shabbiri
ज़िन्दगी भर यही इक काम किया है मैं ने अपने दुख दर्द को नीलाम किया है मैं ने जुर्म समझा है जिसे अहले-ख़िरद ने शादाब हाँ वही जुर्म सरे-आम किया है मैं ने
Shadab Shabbiri
0 likes
ज़मीं नीचे न ऊपर आसमाँ है कहाँ हम लोग लाए जा रहे हैं
Shadab Shabbiri
0 likes
थी किताबी किताब में गुज़री ज़िन्दगी सारी ख़्वाब में गुज़री उस के दरबार से रहा रिश्ता उम्र बस जी जनाब में गुज़री
Shadab Shabbiri
0 likes
मौसम यही, यही था महीना, इसी जगह डूबा था मेरे दिल का सफ़ीना इसी जगह
Shadab Shabbiri
0 likes
मौत आसान नहीं थी लेकिन हम ने जी कर इसे आसानी दी
Shadab Shabbiri
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Shadab Shabbiri.
Similar Moods
More moods that pair well with Shadab Shabbiri's sher.







