किसी ने ख़्वाब में आ कर मुझे ये हुक्म दिया तुम अपने अश्क भी भेजा करो दु'आओं के साथ
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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इसी लिए हमें एहसास-ए-जुर्म है शायद अभी हमारी मोहब्बत नई नई है ना
Afzal Khan
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दानिस्ता मुझ आवारा से टकरा के ये दुनिया कहती है कि अंधे हो दिखाई नहीं देता
Afzal Khan
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तू भी सादा है कभी चाल बदलता ही नहीं हम भी सादा हैं इसी चाल में आ जाते हैं
Afzal Khan
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तेरे जाने से ज़्यादा हैं न कम पहले थे हम को लाहक़ हैं वही अब भी जो ग़म पहले थे
Afzal Khan
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बना रक्खी हैं दीवारों पे तस्वीरें परिंदों की वगर्ना हम तो अपने घर की वीरानी से मर जाएँ
Afzal Khan
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