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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ

Ali Zaryoun

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कितना महफ़ूज़ हूँ मैं कोने में कोई अड़चन नहीं है रोने में मैं ने उस को बचा लिया वरना डूब जाता मुझे डुबोने में

Fahmi Badayuni

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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे

Rahat Indori

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कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़ किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे

Gulzar

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कोई काँटा कोई पत्थर नहीं है तो फिर तू सीधे रस्ते पर नहीं है मैं इस दुनिया के अंदर रह रहा हूँ मगर दुनिया मेरे अंदर नहीं है

Zubair Ali Tabish

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