क्यूँ छोड़ कर गया तू मुझे ऐसे हाल में क्या एक बार भी तुझे ग़ैरत नहीं हुई
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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ज़िक्र करता था जो दिन भर उस का हिज्र में मर गया शायर उस का सुनता रहता हूँ पशेमाँ हो कर ज़िक्र जब करते हैं दीगर उस का
Daqiiq Jabaalii
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ख़ुदाया वस्त-ए-तकल्लुम बहुत सुकून मिला जब उन लबों ने कहा तुम बहुत सुकून मिला
Daqiiq Jabaalii
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तुम कुछ भी कहते रहते हो तुम भी औरों के जैसे हो
Daqiiq Jabaalii
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मैं उसे जानता हूँ अच्छे से मत कहो यार तुम बुरा उस को
Daqiiq Jabaalii
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मर जाओगे जिस दिन तो शाने देगी दुनिया तुम को लेकिन जब तक ज़िंदा हो ता'ने देगी दुनिया तुम को
Daqiiq Jabaalii
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